अमीन सायानी आकाशवाणी की वाणी थे। हिंदी फ़िल्म गीत को समझने, उसे आत्मसात करने को प्रेरित करने वाली आवाज़। हम बिनाका नहीं जानते थे क्या है, कभी कभी जो गीत बजते थे उन्हें भी पहली बार ही सुना होता था - लेकिन जो आवाज़ उन गीतों को introduce कर रही होती थी, उनसे जुड़े क़िस्से, उनके मानी, और उनको बनाने वालों के नाम और पिछले काम से हमें जोड़ रही होती थी उस आवाज़ को ना सिर्फ़ हम जानते थे, बल्कि उसमें वो अपनापन पाते थे जो घर के आँगन में लगे अमरूद के पेड़ से मिलता है।

धन्यवाद अमीन साहब, आपने ना सिर्फ़ एक पूरे दौर को जिया बल्कि उसे हम से साझा भी किया। फिर मिलेंगे, किसी और आकाश में।

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